
तुम्हारी चिता की आग ठंडी पड़ने तक कौन बैठेगा,
किसी को जल्दी होगी घर जाने की, कोई हवा को कोसेगा।
कुछ आँखें नम होंगी, कुछ बस रस्म निभाएँगी,
जो कल तक साथ थे हर पल, आज खामोशी ओढ़ जाएँगी।
कंधों पर उठाकर लाएँगे, फिर कंधे खाली हो जाएँगे,
तेरी बातों के किस्से भी धीरे-धीरे धुँधले हो जाएँगे।
कुछ देर तेरा ज़िक्र होगा, फिर महफ़िल बदल जाएगी,
तेरी कमी जो आज खलेगी, कल आदत में ढल जाएगी।
बस इतना ही क़िस्सा है, इस मिट्टी के अफ़साने का,
एक दिन नाम रह जाएगा, और अंत होगा ज़माने का।
🖤🥀



Write a comment ...